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प्राचीन भारत में वाणिज्य एवं नौकायन

Original price was: ₹560.00.Current price is: ₹540.00.

ISBN: 9789387548077

Author: डॉ. महेन्द्र पाठक

Publisher: Shrinkhala Publishing House

Year: 2018

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Description

प्राचीन भारत में वाणिज्य (व्यापार) और नौकायन का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान था। भारत प्राचीन काल से ही व्यापारिक दृष्टि से समृद्ध देश रहा है। यहाँ के व्यापारी स्थल मार्गों तथा समुद्री मार्गों के माध्यम से देश-विदेश में व्यापार करते थे। भारत से मसाले, कपास, रेशम, हाथीदांत, कीमती पत्थर, सुगंधित पदार्थ तथा धातुओं का निर्यात किया जाता था, जबकि अन्य देशों से सोना, चाँदी और विलासिता की वस्तुओं का आयात होता था।

नौकायन के क्षेत्र में भी प्राचीन भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की थी। भारतीय नाविक बड़े-बड़े जहाजों का निर्माण करते थे और समुद्र के रास्ते दूरस्थ देशों जैसे दक्षिण-पूर्व एशिया, अरब तथा रोम तक यात्रा करते थे। उस समय के प्रमुख बंदरगाहों में लोथल, भरुकच्छ (भड़ौच), ताम्रलिप्ति और मुजिरिस प्रमुख थे। इन बंदरगाहों के माध्यम से व्यापारिक गतिविधियाँ संचालित होती थीं।

समुद्री व्यापार ने भारतीय संस्कृति, कला, धर्म और भाषा के प्रसार में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारतीय व्यापारी और नाविक विदेशों में जाकर सांस्कृतिक संबंध स्थापित करते थे, जिससे भारत का प्रभाव दूर-दूर तक फैला।

इस प्रकार, प्राचीन भारत में वाणिज्य एवं नौकायन ने आर्थिक समृद्धि, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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