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गद्य साहित्य में छायावाद

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गद्य साहित्य में छायावाद पुस्तक हिंदी साहित्य के छायावाद युग और उसके गद्य साहित्य पर प्रभाव का अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें छायावाद की विशेषताओं, विचारधारा, भाषा-शैली तथा प्रमुख गद्य रचनाकारों के योगदान को समझाया गया है। यह पुस्तक हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी अध्ययन सामग्री हो सकती है।

ISBN: 9788193212660

Author: डॉ. प्रीति श्रीवास्तव

Publisher: Shrinkhala Publishing House

Year: 2016

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Description

गद्य साहित्य में छायावाद डॉ. प्रीति श्रीवास्तव द्वारा लिखित एक साहित्यिक अध्ययन पुस्तक है, जिसमें हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण आंदोलन छायावाद के गद्य पक्ष का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। सामान्यतः छायावाद को कविता से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह पुस्तक दर्शाती है कि इस साहित्यिक धारा का प्रभाव गद्य साहित्य पर भी गहराई से पड़ा।

पुस्तक में छायावाद की उत्पत्ति, उसके सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ, भावनात्मकता, आत्मानुभूति, प्रकृति-चित्रण, व्यक्तिवाद तथा भाषा की कलात्मकता जैसे तत्वों की चर्चा की गई है। साथ ही यह बताया गया है कि गद्य साहित्य—जैसे निबंध, आलोचना, संस्मरण और अन्य गद्य विधाओं—में छायावादी प्रवृत्तियाँ किस प्रकार दिखाई देती हैं।

यह पुस्तक हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों और साहित्य के शोधार्थियों के लिए उपयोगी है, क्योंकि यह साहित्यिक प्रवृत्तियों को समझने के साथ-साथ उनके आलोचनात्मक अध्ययन का अवसर भी प्रदान करती है।

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